
1857 की क्रांति के बाद भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना तेजी से विकसित होने लगी। इसी राष्ट्रीय जागरण को संगठित स्वरूप देने के उद्देश्य से वर्ष 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress - INC) की स्थापना हुई। इस संगठन ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा देने और भारतीयों की राजनीतिक आवाज़ को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस लेख में हम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना, उद्देश्य, प्रथम अधिवेशन, प्रारंभिक नेता, उदारवादी युग, महत्वपूर्ण तथ्य तथा परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी MCQs को सरल हिंदी में समझेंगे।
1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का परिचय
Indian National Congress (INC) भारत का सबसे पुराना और ऐतिहासिक राजनीतिक संगठन है। इसकी स्थापना 28 दिसंबर 1885 को भारतीयों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने, उनकी समस्याओं को ब्रिटिश सरकार के सामने रखने तथा राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना में Allan Octavian Hume (ए. ओ. ह्यूम) की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसका प्रथम अधिवेशन मुंबई (तत्कालीन बंबई) के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता Womesh Chandra Bonnerjee ने की थी।
शुरुआत में कांग्रेस का उद्देश्य भारतीयों को एक राजनीतिक मंच प्रदान करना और प्रशासन में उनकी भागीदारी बढ़ाना था। समय के साथ यह संगठन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख नेतृत्वकर्ता बन गया और देश को स्वतंत्रता दिलाने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में अनेक महान नेताओं जैसे Dadabhai Naoroji, Bal Gangadhar Tilak, Gopal Krishna Gokhale, Mahatma Gandhi, Jawaharlal Nehru और Sardar Vallabhbhai Patel ने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रमुख विशेषताएँ
- स्थापना: 28 दिसंबर 1885
- संस्थापक: ए. ओ. ह्यूम
- प्रथम अधिवेशन: बंबई (वर्तमान मुंबई)
- प्रथम अध्यक्ष: डब्ल्यू. सी. बनर्जी (वोमेश चंद्र बनर्जी)
- उद्देश्य: भारतीयों को राजनीतिक मंच प्रदान करना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना
- स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख संगठन
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का महत्व
Indian National Congress ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को संगठित स्वरूप प्रदान किया और स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए देशभर के लोगों को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आधुनिक भारत के इतिहास में इसका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना
Indian National Congress की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को भारतीयों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें एक साझा मंच प्रदान करने के उद्देश्य से की गई थी। उस समय भारत पर ब्रिटिश शासन था और भारतीयों के प्रशासन में भागीदारी बहुत सीमित थी। ऐसे में एक ऐसे संगठन की आवश्यकता महसूस की गई जो भारतीयों की समस्याओं को संगठित रूप से सरकार के सामने रख सके।
कांग्रेस की स्थापना में ब्रिटिश सिविल सेवक Allan Octavian Hume (ए. ओ. ह्यूम) की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनके प्रयासों से भारत के विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षित और जागरूक नेताओं को एक मंच पर लाया गया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन 28 से 31 दिसंबर 1885 तक Mumbai (तत्कालीन बंबई) के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में आयोजित किया गया। इस अधिवेशन की अध्यक्षता Womesh Chandra Bonnerjee ने की थी। इसमें भारत के विभिन्न भागों से 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
प्रारंभिक वर्षों में कांग्रेस का उद्देश्य संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों से भारतीयों की समस्याओं को ब्रिटिश सरकार तक पहुँचाना तथा प्रशासनिक सुधारों की मांग करना था। आगे चलकर यही संगठन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे प्रमुख नेतृत्वकर्ता बन गया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- स्थापना: 28 दिसंबर 1885
- संस्थापक: ए. ओ. ह्यूम (Allan Octavian Hume)
- स्थापना का स्थान: बंबई (वर्तमान मुंबई)
- प्रथम अधिवेशन: गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बंबई
- प्रथम अध्यक्ष: डब्ल्यू. सी. बनर्जी (वोमेश चंद्र बनर्जी)
- प्रथम अधिवेशन में भाग लेने वाले प्रतिनिधि: 72
- उद्देश्य: भारतीयों को राजनीतिक मंच प्रदान करना और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना।
3. स्थापना के प्रमुख कारण
Indian National Congress की स्थापना अचानक नहीं हुई थी। इसके पीछे राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक परिस्थितियाँ जिम्मेदार थीं। 1857 की क्रांति के बाद भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना बढ़ने लगी थी और वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे थे। इसी पृष्ठभूमि में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई।
1. राष्ट्रीय चेतना का विकास
19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में शिक्षा के प्रसार, समाचार-पत्रों और समाज सुधार आंदोलनों के कारण भारतीयों में राष्ट्रीय एकता और राजनीतिक जागरूकता का विकास हुआ। इससे एक अखिल भारतीय संगठन की आवश्यकता महसूस हुई।
2. ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियाँ
ब्रिटिश सरकार की भेदभावपूर्ण नीतियों, ऊँचे करों, प्रशासन में भारतीयों की उपेक्षा तथा आर्थिक शोषण के कारण लोगों में असंतोष बढ़ रहा था। इन समस्याओं को संगठित रूप से उठाने के लिए एक राष्ट्रीय मंच की आवश्यकता थी।
3. भारतीयों की राजनीतिक भागीदारी की मांग
शिक्षित भारतीय चाहते थे कि उन्हें प्रशासन और कानून निर्माण की प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व मिले। कांग्रेस ने इस मांग को संगठित रूप से सरकार के सामने रखने का कार्य किया।
4. अखिल भारतीय संगठन की आवश्यकता
उस समय भारत में कई स्थानीय राजनीतिक संस्थाएँ कार्य कर रही थीं, लेकिन पूरे देश का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई संगठन नहीं था। कांग्रेस ने विभिन्न प्रांतों के नेताओं को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया।
5. ए. ओ. ह्यूम की पहल
Allan Octavian Hume ने भारतीय नेताओं को एक राष्ट्रीय संगठन बनाने के लिए प्रेरित किया। उनके प्रयासों से वर्ष 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना संभव हो सकी।
6. 1857 की क्रांति का प्रभाव
Indian Rebellion of 1857 के बाद भारतीयों में स्वतंत्रता और राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत हुई। हालांकि क्रांति असफल रही, लेकिन इसने संगठित राजनीतिक आंदोलन की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया।
स्थापना के प्रमुख कारण (संक्षेप में)
- राष्ट्रीय चेतना का विकास
- ब्रिटिश शासन की दमनकारी और भेदभावपूर्ण नीतियाँ
- भारतीयों की राजनीतिक अधिकारों की मांग
- अखिल भारतीय संगठन की आवश्यकता
- ए. ओ. ह्यूम की पहल
- 1857 की क्रांति का प्रभाव
- शिक्षित मध्यम वर्ग का उदय
- समाचार-पत्रों और समाज सुधार आंदोलनों का प्रभाव
स्थापना के कारणों का महत्व
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के ये कारण भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की मजबूत नींव बने। कांग्रेस ने देशभर के लोगों को एक साझा राजनीतिक मंच प्रदान किया, जिससे राष्ट्रीय आंदोलन को गति मिली और आगे चलकर भारत की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त हुआ।
4. प्रथम अधिवेशन (1885)
Indian National Congress का प्रथम अधिवेशन 28 से 31 दिसंबर 1885 तक मुंबई (तत्कालीन बंबई) के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में आयोजित किया गया। यह भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास की एक ऐतिहासिक घटना थी, क्योंकि पहली बार देश के विभिन्न भागों से आए प्रतिनिधि एक साझा राजनीतिक मंच पर एकत्र हुए।
इस अधिवेशन की अध्यक्षता Womesh Chandra Bonnerjee (डब्ल्यू. सी. बनर्जी) ने की। इसमें भारत के विभिन्न प्रांतों से 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अधिवेशन का मुख्य उद्देश्य भारतीयों की समस्याओं को संगठित रूप से ब्रिटिश सरकार के सामने रखना तथा प्रशासनिक सुधारों की मांग करना था।
प्रथम अधिवेशन में संविधान के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी मांगों को रखने पर जोर दिया गया। इसने भारत में राष्ट्रीय एकता और राजनीतिक जागरूकता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
प्रथम अधिवेशन की प्रमुख विशेषताएँ
- आयोजन: 28–31 दिसंबर 1885
- स्थान: गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बंबई (वर्तमान मुंबई)
- अध्यक्ष: डब्ल्यू. सी. बनर्जी (वोमेश चंद्र बनर्जी)
- प्रतिनिधियों की संख्या: 72
- संस्थापक: ए. ओ. ह्यूम की महत्वपूर्ण भूमिका
- उद्देश्य: भारतीयों को एक राष्ट्रीय राजनीतिक मंच प्रदान करना
- कार्यप्रणाली: संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से मांगें प्रस्तुत करना
प्रथम अधिवेशन का महत्व
प्रथम अधिवेशन ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को संगठित दिशा प्रदान की। इसी अधिवेशन से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की औपचारिक शुरुआत हुई और आगे चलकर यही संगठन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सबसे प्रमुख नेतृत्वकर्ता बना। यह अधिवेशन भारतीय लोकतांत्रिक और राजनीतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है।
5. प्रारंभिक नेता और उनकी भूमिका
Indian National Congress के प्रारंभिक वर्षों में कई महान नेताओं ने संगठन को मजबूत बनाने और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन नेताओं ने संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों से भारतीयों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया तथा राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा दिया।
1. Allan Octavian Hume
ए. ओ. ह्यूम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख संस्थापकों में से थे। उन्होंने भारत के विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं को एक मंच पर लाने और कांग्रेस की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2. Womesh Chandra Bonnerjee
वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष थे। उन्होंने 1885 के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता की और संगठन को प्रारंभिक दिशा प्रदान की।
3. Dadabhai Naoroji
उन्हें "भारत के ग्रैंड ओल्ड मैन" (Grand Old Man of India) कहा जाता है। उन्होंने ब्रिटिश शासन द्वारा भारत के आर्थिक शोषण को "ड्रेन ऑफ वेल्थ (Drain Theory)" के माध्यम से स्पष्ट किया और भारतीयों के अधिकारों की आवाज़ बुलंद की।
4. Surendranath Banerjee
उन्होंने राष्ट्रीय जागरण और राजनीतिक चेतना फैलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे भारतीयों के नागरिक अधिकारों और प्रशासन में अधिक भागीदारी के समर्थक थे।
5. Pherozeshah Mehta
वे कांग्रेस के प्रमुख उदारवादी नेताओं में से थे। उन्होंने स्थानीय स्वशासन, प्रशासनिक सुधारों और संवैधानिक तरीकों के माध्यम से राजनीतिक परिवर्तन पर बल दिया।
6. Gopal Krishna Gokhale
गोपाल कृष्ण गोखले उदारवादी विचारधारा के प्रमुख नेता थे। उन्होंने शिक्षा, सामाजिक सुधार और संवैधानिक आंदोलनों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। वे Mahatma Gandhi के राजनीतिक गुरु भी माने जाते हैं।
प्रारंभिक नेताओं का योगदान
- भारतीयों को एक राष्ट्रीय राजनीतिक मंच प्रदान किया।
- राष्ट्रीय चेतना और एकता को मजबूत किया।
- संवैधानिक और शांतिपूर्ण आंदोलन की परंपरा विकसित की।
- प्रशासनिक सुधारों और भारतीय प्रतिनिधित्व की मांग उठाई।
- स्वतंत्रता आंदोलन की मजबूत नींव रखी।
6. कांग्रेस के उद्देश्य
Indian National Congress की स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारतीयों को एक राष्ट्रीय राजनीतिक मंच प्रदान करना तथा उनकी समस्याओं और मांगों को संगठित रूप से ब्रिटिश सरकार के सामने रखना था। प्रारंभिक वर्षों में कांग्रेस ने संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों से राजनीतिक सुधारों की मांग की।
समय के साथ कांग्रेस के उद्देश्य व्यापक होते गए और यह संगठन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख नेतृत्वकर्ता बन गया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख उद्देश्य
1. राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना
भारत के विभिन्न प्रांतों, भाषाओं और समुदायों के लोगों को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय एकता और भाईचारे की भावना विकसित करना।
2. भारतीयों को राजनीतिक मंच प्रदान करना
भारतीयों को अपनी समस्याओं, विचारों और मांगों को सरकार के सामने रखने के लिए एक संगठित मंच उपलब्ध कराना।
3. प्रशासनिक सुधारों की मांग
ब्रिटिश शासन में प्रशासनिक सुधार, न्यायपूर्ण नीतियाँ और सरकारी सेवाओं में भारतीयों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग करना।
4. राजनीतिक अधिकारों की रक्षा
भारतीय नागरिकों के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक अधिकारों की रक्षा करना तथा उनके हितों की आवाज़ उठाना।
5. राष्ट्रीय चेतना का विकास
देशवासियों में राष्ट्रीय भावना, राजनीतिक जागरूकता और स्वतंत्रता के प्रति चेतना विकसित करना।
6. संवैधानिक और शांतिपूर्ण आंदोलन
प्रारंभिक वर्षों में कांग्रेस ने याचिकाओं, प्रस्तावों और संवाद के माध्यम से शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीकों से अपनी मांगें प्रस्तुत करने पर बल दिया।
7. स्वशासन की दिशा में प्रयास
समय के साथ कांग्रेस का लक्ष्य भारतीयों के लिए अधिक राजनीतिक अधिकार प्राप्त करना और अंततः स्वराज (Self-Government) तथा पूर्ण स्वतंत्रता की प्राप्ति बन गया।
कांग्रेस के उद्देश्यों का सार
- राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना
- भारतीयों को राजनीतिक मंच प्रदान करना
- प्रशासनिक सुधारों की मांग करना
- भारतीयों के अधिकारों की रक्षा करना
- राष्ट्रीय चेतना और राजनीतिक जागरूकता बढ़ाना
- संवैधानिक और शांतिपूर्ण आंदोलन चलाना
- स्वशासन और स्वतंत्रता की दिशा में कार्य करना
कांग्रेस के उद्देश्यों का महत्व
Indian National Congress के उद्देश्यों ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को स्पष्ट दिशा प्रदान की। इन्हीं उद्देश्यों के आधार पर कांग्रेस ने लाखों भारतीयों को स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा और आगे चलकर भारत की आज़ादी के आंदोलन का सबसे प्रमुख संगठन बन गई।
7. कांग्रेस के प्रारंभिक चरण (उदारवादी युग)
Indian National Congress के इतिहास का प्रारंभिक चरण 1885 से 1905 तक का समय उदारवादी युग (Moderate Phase) कहलाता है। इस दौर में कांग्रेस का नेतृत्व उदारवादी नेताओं के हाथों में था, जो संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों से भारतीयों के अधिकारों की मांग करते थे।
उदारवादी नेताओं का विश्वास था कि ब्रिटिश सरकार से संवाद, याचिकाओं, प्रस्तावों और प्रार्थना-पत्रों के माध्यम से प्रशासनिक सुधार और भारतीयों के लिए अधिक राजनीतिक अधिकार प्राप्त किए जा सकते हैं। इसलिए इस काल को "प्रार्थना, निवेदन और विरोध की नीति" (Prayer, Petition and Protest) का युग भी कहा जाता है।
इस अवधि में कांग्रेस ने प्रशासनिक सुधार, सरकारी सेवाओं में भारतीयों की भागीदारी, करों में कमी, न्यायपालिका की स्वतंत्रता तथा विधान परिषदों के अधिकारों में वृद्धि जैसी मांगों को प्रमुखता से उठाया।
उदारवादी युग के प्रमुख नेता
- Dadabhai Naoroji
- Gopal Krishna Gokhale
- Pherozeshah Mehta
- Surendranath Banerjee
- Womesh Chandra Bonnerjee
उदारवादी युग की प्रमुख विशेषताएँ
- समयावधि: 1885–1905
- संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों में विश्वास
- याचिकाओं, प्रस्तावों और संवाद के माध्यम से मांगें प्रस्तुत करना
- प्रशासनिक एवं राजनीतिक सुधारों की मांग
- भारतीयों की सरकारी सेवाओं में भागीदारी बढ़ाने पर जोर
- राष्ट्रीय चेतना और राजनीतिक जागरूकता का प्रसार
- पूरे भारत के नेताओं को एक मंच पर लाना
उदारवादी युग का महत्व
उदारवादी युग ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की मजबूत नींव रखी। इसी काल में भारतीयों में राजनीतिक चेतना का विकास हुआ, राष्ट्रीय एकता मजबूत हुई और स्वतंत्रता आंदोलन को संगठित स्वरूप मिला। आगे चलकर इसी आधार पर उग्रवादी आंदोलन और जनआंदोलनों का विकास हुआ, जिसने भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई को नई गति प्रदान की।
8. महत्वपूर्ण तथ्य
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य प्रतियोगी परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महत्वपूर्ण तथ्य
- Indian National Congress की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को हुई थी।
- इसकी स्थापना में Allan Octavian Hume (ए. ओ. ह्यूम) की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
- कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन Mumbai (तत्कालीन बंबई) के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में आयोजित हुआ था।
- प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता Womesh Chandra Bonnerjee (डब्ल्यू. सी. बनर्जी) ने की थी।
- प्रथम अधिवेशन में 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
- कांग्रेस के इतिहास का 1885 से 1905 तक का काल उदारवादी युग (Moderate Phase) कहलाता है।
- उदारवादी नेताओं की नीति "प्रार्थना, निवेदन और विरोध" (Prayer, Petition and Protest) पर आधारित थी।
- Dadabhai Naoroji, Gopal Krishna Gokhale, Pherozeshah Mehta और Surendranath Banerjee प्रारंभिक प्रमुख नेता थे।
- प्रारंभिक वर्षों में कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक सुधार और भारतीयों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा करना था।
- आगे चलकर कांग्रेस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे प्रमुख संगठन बन गई।
परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण तथ्य
- स्थापना → 28 दिसंबर 1885
- संस्थापक → ए. ओ. ह्यूम (A. O. Hume)
- प्रथम अधिवेशन → बंबई (मुंबई)
- प्रथम अध्यक्ष → डब्ल्यू. सी. बनर्जी (W. C. Bonnerjee)
- प्रतिनिधियों की संख्या → 72
- उदारवादी युग → 1885–1905
- प्रमुख नीति → प्रार्थना, निवेदन और विरोध
- प्रमुख उद्देश्य → राष्ट्रीय एकता, राजनीतिक अधिकार और प्रशासनिक सुधार
SSC, UPSC, Railway, Police, CTET, UPTET तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना, प्रथम अधिवेशन, प्रारंभिक नेताओं, उदारवादी युग तथा कांग्रेस के उद्देश्यों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। इसलिए इन तथ्यों को अच्छी तरह याद रखना आवश्यक है।
9. MCQs (महत्वपूर्ण प्रश्न)
1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना कब हुई थी?
A) 1857
B) 1875
C) 1885
D) 1905
✅ उत्तर: C) 1885
2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना किसने की थी?
A) महात्मा गांधी
B) ए. ओ. ह्यूम
C) दादाभाई नौरोजी
D) बाल गंगाधर तिलक
✅ उत्तर: B) ए. ओ. ह्यूम
3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन कहाँ आयोजित हुआ था?
A) कोलकाता
B) दिल्ली
C) बंबई (मुंबई)
D) इलाहाबाद
✅ उत्तर: C) बंबई (मुंबई)
4. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
A) दादाभाई नौरोजी
B) गोपाल कृष्ण गोखले
C) डब्ल्यू. सी. बनर्जी
D) बाल गंगाधर तिलक
✅ उत्तर: C) डब्ल्यू. सी. बनर्जी
5. कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में कितने प्रतिनिधियों ने भाग लिया था?
A) 52
B) 62
C) 72
D) 82
✅ उत्तर: C) 72
6. कांग्रेस के इतिहास का उदारवादी युग किस अवधि को कहा जाता है?
A) 1857–1885
B) 1885–1905
C) 1905–1919
D) 1919–1942
✅ उत्तर: B) 1885–1905
7. उदारवादी नेताओं की प्रमुख नीति क्या थी?
A) सशस्त्र क्रांति
B) असहयोग आंदोलन
C) प्रार्थना, निवेदन और विरोध
D) भारत छोड़ो आंदोलन
✅ उत्तर: C) प्रार्थना, निवेदन और विरोध
8. "भारत के ग्रैंड ओल्ड मैन" (Grand Old Man of India) किसे कहा जाता है?
A) गोपाल कृष्ण गोखले
B) दादाभाई नौरोजी
C) बाल गंगाधर तिलक
D) सुरेंद्रनाथ बनर्जी
✅ उत्तर: B) दादाभाई नौरोजी
9. कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन का आयोजन किस कॉलेज में हुआ था?
A) प्रेसीडेंसी कॉलेज
B) हिंदू कॉलेज
C) गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज
D) एल्फिंस्टन कॉलेज
✅ उत्तर: C) गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज
10. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या था?
A) ब्रिटिश शासन को तुरंत समाप्त करना
B) भारतीयों को राजनीतिक मंच प्रदान करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना
C) भारत में शिक्षा व्यवस्था समाप्त करना
D) केवल सामाजिक सुधार करना
✅ उत्तर: B) भारतीयों को राजनीतिक मंच प्रदान करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना
11. कांग्रेस के प्रमुख उदारवादी नेताओं में कौन-कौन शामिल थे?
A) महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस
B) भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद
C) दादाभाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले और फिरोजशाह मेहता
D) जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल
✅ उत्तर: C) दादाभाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले और फिरोजशाह मेहता
12. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आगे चलकर किस आंदोलन का प्रमुख संगठन बनी?
A) स्वदेशी आंदोलन
B) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन
C) किसान आंदोलन
D) चिपको आंदोलन
✅ उत्तर: B) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन
10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना कब हुई थी?
उत्तर: Indian National Congress की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को हुई थी।
प्रश्न 2: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना किसने की थी?
उत्तर: कांग्रेस की स्थापना में Allan Octavian Hume (ए. ओ. ह्यूम) की प्रमुख भूमिका थी।
प्रश्न 3: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन कहाँ आयोजित हुआ था?
उत्तर: इसका प्रथम अधिवेशन मुंबई (तत्कालीन बंबई) के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में आयोजित हुआ था।
प्रश्न 4: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष Womesh Chandra Bonnerjee (डब्ल्यू. सी. बनर्जी) थे।
प्रश्न 5: कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में कितने प्रतिनिधियों ने भाग लिया था?
उत्तर: प्रथम अधिवेशन में 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
प्रश्न 6: कांग्रेस के इतिहास का उदारवादी युग किसे कहा जाता है?
उत्तर: 1885 से 1905 तक की अवधि को कांग्रेस का उदारवादी युग (Moderate Phase) कहा जाता है।
प्रश्न 7: उदारवादी नेताओं की प्रमुख नीति क्या थी?
उत्तर: उदारवादी नेताओं की प्रमुख नीति "प्रार्थना, निवेदन और विरोध" (Prayer, Petition and Protest) थी। वे संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों से अपनी मांगें रखते थे।
प्रश्न 8: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: कांग्रेस की स्थापना का मुख्य उद्देश्य भारतीयों को एक राष्ट्रीय राजनीतिक मंच प्रदान करना, उनके अधिकारों की रक्षा करना, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना तथा ब्रिटिश सरकार के समक्ष भारतीयों की समस्याओं को संगठित रूप से प्रस्तुत करना था.
📌 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- Indian National Congress की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को हुई थी।
- इसकी स्थापना में Allan Octavian Hume (ए. ओ. ह्यूम) की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
- कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन मुंबई (तत्कालीन बंबई) के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में आयोजित हुआ था।
- प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता Womesh Chandra Bonnerjee (डब्ल्यू. सी. बनर्जी) ने की थी।
- प्रथम अधिवेशन में 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
- कांग्रेस के इतिहास का 1885–1905 का काल उदारवादी युग (Moderate Phase) कहलाता है।
- उदारवादी नेताओं की नीति "प्रार्थना, निवेदन और विरोध" (Prayer, Petition and Protest) पर आधारित थी।
- Dadabhai Naoroji ने ड्रेन ऑफ वेल्थ (Drain Theory) का सिद्धांत प्रस्तुत किया।
- Gopal Krishna Gokhale, Pherozeshah Mehta, Surendranath Banerjee और Dadabhai Naoroji कांग्रेस के प्रमुख उदारवादी नेता थे।
- कांग्रेस का प्रारंभिक उद्देश्य भारतीयों को राजनीतिक मंच प्रदान करना, प्रशासनिक सुधारों की मांग करना तथा राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना था।
- आगे चलकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण संगठन बन गई।
निष्कर्ष
Indian National Congress भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली संगठन था। इसकी स्थापना वर्ष 1885 में भारतीयों को एक राष्ट्रीय राजनीतिक मंच प्रदान करने तथा उनके अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी। प्रारंभिक वर्षों में कांग्रेस ने संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों से प्रशासनिक सुधारों की मांग की तथा भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना का विकास किया।
समय के साथ कांग्रेस ने स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया और Mahatma Gandhi, Jawaharlal Nehru, Sardar Vallabhbhai Patel, Dadabhai Naoroji तथा अनेक अन्य नेताओं के नेतृत्व में भारत को स्वतंत्रता दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास हमें राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और संगठित संघर्ष की शक्ति का महत्व सिखाता है। आधुनिक भारत के निर्माण और स्वतंत्रता संग्राम में इसका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा तथा यह आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रेरित करता रहेगा।
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